आधुनिक भारत के निर्माताओं में दयानन्द का स्थान सर्वोच्च-- ज्ञानेंद्र आवाना आईपीएस

 

दयानन्द की जीवन एवं सत्यार्थ प्रकाश को जीवन का ध्येय बनाये-- स्वामी प्रणवानंद सरस्वती


दयानन्द का अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश अमूल्य निधि-- प्रोफेसर डॉ रामचन्द्र 

श्रीराम सेन सिलवानी

दयानन्द के उपकारों का सदैव ऋणी रहेगा मानव समाज-- अमित सविता डिप्टी एसपी

महर्षि दयानन्द की 198 वीं जयंती पर परिचर्चा कर  मनाई गई


महरौनी(ललितपुर) महर्षि दयानन्द सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी के तत्वाधान में  महर्षि दयानंद सरस्वती के 198 जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर "विश्व की  महर्षि दयानन्द की  देन" विषय पर वेविनार का आयोजन आईपीएस अधिकारी महात्मा ज्ञानेंद्र आवाना दिल्ली की अध्यक्षता एवं स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के मुख्य आतिथ्य एवं संयोजक आर्य रत्न शिक्षक  लखन लाल आर्य के संचालन में सम्पन्न हुआ 

सारस्वत अतिथि  स्वामी प्रणवानंद जी ने बहुत ही प्रेरणा वर्धक अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि हम सभी को जीवन मे महर्षि दयानन्द की जीवनी एवं अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश को लगातार पढ़ने से जीवन मे कभी भी निराशा नही आएगी बल्कि नित नयी सकारात्मक ऊर्जा  प्राप्त होगी।उन्होंने गुरुदत्त विद्यार्थी जी और स्वामी दयानंद के अंतिम समय का वर्णन बड़े मार्मिक ढंग से किया और गुरुदत्त विद्यार्थी ने जो स्वामी दयानंद के अंतिम क्षणों में घटित हुआ उसको देखा और उससे प्रभावित होकर अपनी जीवनधारा ही बदल ली। 


अध्यक्षता करते हुए आईपीएस अधिकारी महात्मा ज्ञानेंद्र आवाना दिल्ली ने बड़े उत्साह में ऋषि ऋषि जी के लेखन के मूल्य के बारे में बतलाया। उनका कहना था कि महर्षि द्वारा लिखित हर पन्ना अपने आप में एक अध्याय है।  उसमें ज्ञान की बातें लबालब भरी हुई हैं। उन्होंने महर्षि दयानंद के बहुचर्चित काशी शास्त्रार्थ का प्रसंग विस्तार से सुनाया जो बहुत ही शिक्षाप्रद था। 


कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस संस्थान के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ रामचन्द्र ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माताओं में महर्षि दयानन्द का स्थान सर्वोच्च है। वे ऐसे महानायक थे जिनके चिन्तन में न केवल भारत की बल्कि वैश्विक समस्याओं का समाधान था। सत्यार्थ प्रकाश, संस्कार विधि एवं ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका उनकी कालजयी रचनाएं हैं। परतंत्र भारत में स्वदेशी, स्वभाषा एवं स्वराज का नारा बुलंद करने वाले वे पहले महापुरुष थे। आर्ष शिक्षा के द्वारा उन्होंने भारत के विश्व गुरु बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी शिक्षाओं पर चलकर हम स्वस्थ, सशक्त एवं ऊर्जावान भारत का निर्माण कर सकते हैं।


आचार्य भवदेव शास्त्री  ने अपने व्याख्यान में स्वामी दयानंद की यात्राओं का ऐतिहासिक परिपेक्ष रखा। उन्होंने स्वामी दयानंद ने जो महिलाओं को समान अधिकार देने के लिए संघर्ष किया उस पर प्रकाश डाला।

 

अमित कुमार सविता प्रशिक्षु  डिप्टी एसपी  ने स्वामी दयानंद के बारे में प्रेरणादायक बातें बतायीं।

आचार्य नंदकिशोर जी ने  अपने बचपन की घटनाएं बताई कि जब लोगों की मान्यता यह थी कि आर्य समाज ईश्वर को नहीं मानता। परंतु उनके पिता ने जो भारतीय सेना में थे उन्होंने इस सब के बावजूद भी उनकी वैदिक शिक्षा दीक्षा कराई। उन्होंने स्वामी ओमानंद की चर्चा की, उनके कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विस्तार से देवेंद्र नाथ मुखोपाध्याय लिखित स्वामी दयानंद की जीवनी के बारे में बताया कि देवेंद्र नाथ जी आर्य समाजी नहीं थे फिर भी उन्होंने खोज की और स्वामी जी के जीवन के ऐसे रहस्यों को उजागर किया जो लोगों को पहले से नहीं ज्ञात थे। इस सारी प्रक्रिया में उन्होंने अपने जीवन की सब धन संपत्ति भी लुटा दी। आजकल आचार्य नंदकिशोर जी  विश्व भारती गुरुकुल रोहतक में अध्यापन कर रहे हैं। जिसमें सीबीएसई और वैदिक दर्शन दोनों की पढ़ाई एक साथ होती है जिससे विद्यार्थियों का चरित्र भी सुदृढ़ हो और उनके जीवन में एक अच्छा स्थान मिलें। यहां से  शिक्षित विद्यार्थी देश की मुख्यधारा को सुदृढ़ बना सकेंगे। 

श्रीमती कविता आर्य जी ने कार्यक्रम के आरंभ में वैदिक भजनों से समा बांध दिया। जिससे सभी आत्म विभोर हो गये। इस तरह के आयोजन भविष्य में भी होते रहेंगे ऐसा आश्वासन इस कार्यक्रम के संचालक श्री लखन लाल आर्य जी ने दिया।

गुरुकुल पौंधा के आचार्य  शिवदेव आर्य एवं आचार्य भवदेव शास्त्री अजमेर के सहयोग की भी सराहना की गई।

वेविनार में आचार्य योगेश योगी दिल्ली,आनंद पुरुषार्थी नर्मदापुरम,रामसेवक निरंजन शिक्षक,रामकुमार सेन अजान,राजेन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव प्राचार्य,नरेश यादव मुंबई,ध्यान यादव मिदरवाहा,नीरज वर्मा,डॉ सत्येंद्र शास्त्री ग्वालियर,डॉ यतीन्द्र कटारिया,अवधेश प्रताप सिंह बैस,शेर सिंह अलीगढ़,शिव कुमार यादव बिजौर,बाबू सिंह महरौनी,डॉ वेद प्रकाश शर्मा बरेली,सरोज पुरंग दिल्ली,सुरेश गौतम अमेरिका, डॉ युधिष्ठर त्रिवेदी अमेरिका,चन्द्रकान्ता आर्या चंडीगढ़ सहित सम्पूर्ण विश्व से आर्य जन जुड रहें हैं।

संचालन संयोजक आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य एवं आभार मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ ने जताया।

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