Kisan Sangharsh Samiti की 290 वीं किसान पंचायत सम्पन्न

जंगली जानवरों से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा सुनिश्चित करें सरकार

Kisan Sangharsh Samiti की 290 वीं किसान पंचायत सम्पन्न


श्रीराम सेन सिलवानी



Kisan Sangharsh Samiti के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम (Dr Sunilam) ने किसान पंचायत (Kisan Panchayat) को संबोधित करते हुए कहा कि 12 फरवरी 1998 से लगातार किसान पंचायत करने का सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि मुलताई के किसानों ने नष्ट हुई फसलों के मुआवजे की लड़ाई में 24 किसानों  ने शहादत दी। उन्होंने बताया कि किसान संघर्ष समिति ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के साथ मिलकर मध्य प्रदेश सहित देश में एमएसपी की कानूनी गारंटी की लड़ाई लड़ी थी। बाद में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने संयुक्त किसान मोर्चा का गठन किया। संयुक्त किसान मोर्चा का गठन मात्र 2 दिन के आंदोलन के लिए किया था । लेकिन हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केन्द्र सरकार के अढ़ियल व्यवहार के कारण आंदोलन 380 दिन तक चला जिसमें 617 किसानों की शहादत हुई। संयुक्त किसान मोर्चा की पांच सुत्रीय मांगों पर केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद किसान आंदोलन स्थगित किया गया था। लेकिन अब तक केंद्र सरकार ने किसी भी आश्वासन पर अमल नहीं किया है।

      सीहोर से अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव प्रहलाद दास बैरागी ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार एमएसपी और कर्ज माफी पर किसानों से कोई बात नहीं कर रही है। किसानों को  2018 का ना तो भावांतर दिया है ना ही गेहूं पर बोनस दिया है। किसानों की अभी भी 62% बोनस राशि बकाया है। किसान अपनी फसल औने पौने दामों पर व्यापारियों को बेचने पर मजबूर है। हिंदुत्व और गौ रक्षा के नाम पर सरकार लोगों को बरगला रही है। उन्होंने कहा कि एमएसपी और कर्ज माफी की मांग को लेकर उनका संगठन सड़क पर उतरने के लिए तैयार है।

      किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड आराधना भार्गव ने कहा कि  सरकारें किस तरह से किसानों के साथ चालाकी कर रही है यह समझना होगा। सरकार ने  फसलों के समर्थन मूल्य की घोषणा तो कर दी लेकिन समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होने से एम एस पी का क्या औचित्य है? पटवारियों ने किसानों की फसल की गिरदावरी दर्ज नहीं की थी जिस कारण पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं। इसकी बारीकियों को भी समझना होगा।

   संयुक्त किसान मोर्चा रीवा के संयोजक एड शिव सिंह ने कहा कि एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही। समिति प्रबंधकों की कमीशन खोरी की शिकायतें लगातार मिल रही है फसल बीमा का लाभ भी किसानों को नहीं मिल रहा है। रीवा संभाग में आवारा पशुओं के चलते किसानों की फसलें नष्ट हो रही है लेकिन सरकार गंभीर नहीं है।  सारे गौशाला खोल दिए गए हैं आवारा पशुओं से नष्ट हुई फसलों का बीमा भी नही दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन की जरूरत है।

        भारतीय किसान मजदूर महासंघ के उपाध्यक्ष राहुल राज ने कहा कि मुख्यमंत्री 2 साल बाद आज फसल बीमा का पैसा देने का ढोल पीट रहे हैं। वह पैसा किसानों की मेहनत का है 2 साल पहले यदि बीमा राशि मिल जाती है तो उसका ब्याज भी किसानों को मिला होता। उन्होंने कहा कि हमें एमएसपी की लड़ाई के साथ साथ क्षेत्रीय मुद्दे और सिंचाई परियोजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा।

      सिवनी से किसंस के प्रदेश सचिव डॉ राजकुमार सनोडिया ने कहा कि वर्तमान फसल गेंहूँ, चना,सरसों सहित अन्य फसलों का पंजीयन 5 फरवरी से किया जाना था परंतु ऑनलाइन केंद्रों में साइड लिंक ना मिलने के कारण किसान भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में हितग्राहियों को पूर्व की तरह ही राशि दी जा रही है जबकि उपयोगी सामग्रियों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है इसलिए हितग्राही कर्ज में डुब रहे है।

   सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर ने कहा कि पिछले वर्ष करोना महामारी के समय में बिजली बिल माफ करने की बात प्रशासन ने की थी लेकिन अब सख्ती से बिजली बील वसूली की जा रही है । उन्होंने बताया कि बिजली के करंट से पशु की मौत पर 30 हजार रुपये मुआवजा का प्रावधान है लेकिन अभी तक प्रदेश भर में कहीं भी 30 हजार रूपये मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि उनकी गाय की मौत का 20 हजार रूपये मुआवजा प्रशासन से लड़कर लिया है आगे शेष 10 हजार रूपये लेने  के लिए तथा इस तरह की घटनाओं के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।

         सतना से अग्रगामी किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि किसान लगातार खाद बीज की किल्लत का सामना कर रहे हैं। सरकार द्वारा खाद की कम आपूर्ति किये जाने से किसानों को महंगे दाम पर खाद बीज खरीदना पड़ रहा है। अभी प्रदेश सरकार द्वारा नहरों से लिये जाने वाले पानी पर 500 रुपये प्रति एकड़ की राशि किसानों से वसूल करने का फरमान जारी किया गया है। ये राशि छोटे किसानों के लिए बहुत ज्यादा है उन्होंने राज्य सरकार से इस तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग करता है।

   रायसेन से किसान जागृति संगठन के अध्यक्ष इरफान जाफरी ने कहा कि एम एस पी पर खरीद के लिए किसानों के पंजीयन की  प्रक्रिया जटिल कर दी गई है। किसी भी प्रकार के पंजीयन संबंधित संशोधन अनाज पंजीयन कराने के समय ही करवाए जाते है ताकि किसान परेशान होकर पंजीयन ही ना करा सके।

इंदौर से किसंस के  संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून भले ही वापस ले लिए हो  लेकिन आंदोलनकारी किसानों पर लादे गए मुकदमें वापस नहीं लिए है। किसानों के हत्यारे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को जमानत दिलाने के लिए सरकार ने न्यायालय पर दबाव डाला। यह किसानों के लिए चिंता का विषय है।

किसंस सिंगरौली के जिलाध्यक्ष एड अशोकसिंह पैगाम ने कहा कि सुलेरी कोल माइंस के विस्थापितों के साथ पुलिस प्रशासन द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है। उनका बिजली पानी बंद कर दिया गया है तथा मुआवजा भी नहीं दिया गया है। गौड़ बांध परियोजना से कई आदिवासियों का पलायन होगा। पांचवी अनुसूची में होने पर भी प्रशासन फर्जी ग्राम सभा के प्रस्ताव बनाकर आदिवासियों की जमीन हड़प रही है। आदिवासियों की आजीविका वनों पर निर्भर थी वह नष्ट होने से आदिवासियों की आजीविका भी संकट में पड़ गई है। 

     रीवा से शहीद राघवेंद्र किसंस के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंखू ने कि  रीवा और आसपास के जिलों में एमएसपी की कानूनी गारंटी तो यात्रा शुरू करने को लेकर बैठक की जा रही है फसल बीमा ऋण माफी बिजली बिल के मुद्दे पर भी किसानों के साथ चर्चा कर आगे आंदोलन करने की रणनीति बनाई जा रही है।

       रायसेन से किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव श्री राम सेन ने कहा कि बीना परियोजना शुरू करने के पहले प्रशासन की ओर से कहा गया था कि किसी की जमीन डूब में नहीं जाएगी लेकिन अब किसानों को मुआवजा का लालच दिया जा रहा हैं।

     रीवा से किसंस के कार्य.जिलाध्यक्ष ललीत मिश्रा ने कहा कि  सोसायटियों को स्व सहायता समूह के हवाले किया जा रहा है। इसे सरकार की सोसाइटी को खत्म करने की मंशा दिखलाई पड़ रही है। उन्होंने बताया कि किसानों को ऋण माफी के प्रमाण पत्र प्रशासन की ओर से दिए गए थे इसके बावजूद भी बैंक की तरफ से किसानों को ऋण वसूली के नोटिस भेजे जा रहे हैं।

      ऑनलाइन किसान पंचायत में क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय संयोजक बाबू सिंह राजपूत सतना से विश्वजीत सिंह परिहार, सीधी से रोको टोको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी, छतरपुर से किसान संघ के अध्यक्ष दिलीप शर्मा एवं सिंगरौली से किसान संघर्ष समिति के संयोजक निसार आलम अंसारी  शामिल हुए।

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